Monday, 14 December 2015

अब जीना चाहता हूँ

ऐ जिंदगी ! 
तेरी मर्ज़ी से तो 
बहुत जी लिए हम 
अब कुछ देर मेरे पास बैठ
और मेरी बात सुन्
अब तक सर झुका कर माना है
तेरा हर हुक्म और बस्
तेरे ही बताये रास्ते पर
चला हूँ हर कदम
समाज,धर्म,गुरु,ईश्वर
रिश्ते-नाते और परिवार
सब मिले हैं विरासत में
साथ ही मिले हैं
उनके साथ चलने को
दम-घोंटू नियम
इन ‘नियम-कायदों’ को
उसूल बना कर पूजा है ता उम्र
भावनाओं की आड़ में
छला गया हूँ बहुत बार
खुद को मिटा कर
तेरे हर इम्तिहान को
पास किया है अव्वल
और ना चाहते हुए भी
तेरी शर्तों पर
जिया है पूरा जीवन
पर अब
जीना चाहता हूँ
अपने जीवन को भरपूर
जहाँ मेरा जीवन मेरा हो
सिर्फ मेरा,
मेरी सफलता-असफलता
खुद की हार-जीत
मेरे मानदंडो की कसौटी पर कसा
सिर्फ और सिर्फ
‘मेरा जीवन’
....................सुधाकर पाठक
(‘मेरा जीवन’ कविता का अंश)

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